शहीद हुए जो इस मिट्टी पर
आओ उनको नमन करें
आओ मिलकर शीश झुकाकर
उस वीरों को मनन करें
.
हम भारत के वीर सिपाही
प्रण करते हैं मिलकर आज
देकर कतरा खून खून का
रख लेंगे मिट्टी की लाज
.
प्रण करते हैं मातृभूमि पर
आंच नहीं आने देंगे
घुसपैठ हो सीमा पर तो
जीवित नहीं जाने देंगे
.
मिट्टी की अस्मत के खातिर
हम कुछ भी कर सकते हैं
न्योता जो आया वैसा तो
हम हँसकर मर सकते हैं
.
कसम हमे उस रस्सी की
जिसपर झूले थे राजगुरु
हम बढ़कर आगे आएँगे
जब होगी वैसी जंग शुरू
.
धधक रही है दग्ध हृदय में
राष्ट्रवाद की भीषण आग
उत्प्रेरक का काम निभाती
विधवाओं की सूनी मांग
.
प्रण करते हैं उन अश्कों को
हम यूँ ही नहीं बहने देंगे
हर कारक को उन अश्कों का
हम जीवित नहीं रहने देंगे
.
राष्ट्रवाद की सोच समूचे
भारत में लहरा देंगे
कश्मीर नहीं लाहौर पहुँचकर
विजयी तिरंगा फहरा देंगे
- जयशंकर पाठक
आओ उनको नमन करें
आओ मिलकर शीश झुकाकर
उस वीरों को मनन करें
.
हम भारत के वीर सिपाही
प्रण करते हैं मिलकर आज
देकर कतरा खून खून का
रख लेंगे मिट्टी की लाज
.
प्रण करते हैं मातृभूमि पर
आंच नहीं आने देंगे
घुसपैठ हो सीमा पर तो
जीवित नहीं जाने देंगे
.
मिट्टी की अस्मत के खातिर
हम कुछ भी कर सकते हैं
न्योता जो आया वैसा तो
हम हँसकर मर सकते हैं
.
कसम हमे उस रस्सी की
जिसपर झूले थे राजगुरु
हम बढ़कर आगे आएँगे
जब होगी वैसी जंग शुरू
.
धधक रही है दग्ध हृदय में
राष्ट्रवाद की भीषण आग
उत्प्रेरक का काम निभाती
विधवाओं की सूनी मांग
.
प्रण करते हैं उन अश्कों को
हम यूँ ही नहीं बहने देंगे
हर कारक को उन अश्कों का
हम जीवित नहीं रहने देंगे
.
राष्ट्रवाद की सोच समूचे
भारत में लहरा देंगे
कश्मीर नहीं लाहौर पहुँचकर
विजयी तिरंगा फहरा देंगे
- जयशंकर पाठक
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