मुझे रुख़सत किया तुमने, मगर चिर संगिनी हो तुम।
विचरता बादलों सा हूँ, सुनहली दामिनी हो तुम।
तृणक हूँ मैं, हवा हो तुम, तुम्हारे साथ उड़ता हूँ -
विरह का राग हूँ यदि मैं, मिलन की रागिनी हो तुम।
- प्रदग्ध