Saturday, 27 February 2021

मुक्तक

 मुझे रुख़सत किया तुमने, मगर चिर संगिनी हो तुम।

विचरता  बादलों  सा  हूँ, सुनहली  दामिनी  हो  तुम।

तृणक हूँ  मैं,  हवा  हो  तुम, तुम्हारे  साथ  उड़ता  हूँ -

विरह का राग हूँ यदि मैं, मिलन की  रागिनी हो तुम।

- प्रदग्ध

Friday, 27 April 2018

सुरभित यादें

फिर दोपट्टे की महक में घुल रहा हूँ मैं
फिर किसी ने नर्म अधरों से पुकारा है

चूड़ियों की खनखनाहट सुन रहा हूँ मैं
फिर किसी रात भर जग कर पुकारा है


Wednesday, 11 October 2017

श्रद्धांजलि

शहीद हुए जो इस मिट्टी पर
आओ उनको नमन करें
आओ मिलकर शीश झुकाकर
उस वीरों को मनन करें
.
हम भारत के वीर सिपाही
प्रण करते हैं मिलकर आज
देकर कतरा खून खून का
रख लेंगे मिट्टी की लाज
.
प्रण करते हैं मातृभूमि पर
आंच नहीं आने देंगे
घुसपैठ हो सीमा पर तो
जीवित नहीं जाने देंगे
.
मिट्टी की अस्मत के खातिर
हम कुछ भी कर सकते हैं
न्योता जो आया वैसा तो
हम हँसकर मर सकते हैं
.
कसम हमे उस रस्सी की
जिसपर झूले थे राजगुरु
हम बढ़कर आगे आएँगे
जब होगी वैसी जंग शुरू
.
धधक रही है दग्ध हृदय में
राष्ट्रवाद की भीषण आग
उत्प्रेरक का काम निभाती
विधवाओं की सूनी मांग
.
प्रण करते हैं उन अश्कों को
हम यूँ ही नहीं बहने देंगे
हर कारक को उन अश्कों का
हम जीवित नहीं रहने देंगे
.
राष्ट्रवाद की सोच समूचे
भारत में लहरा देंगे
कश्मीर नहीं लाहौर पहुँचकर
विजयी तिरंगा फहरा देंगे

- जयशंकर पाठक

Saturday, 7 October 2017

यूँ ही

हमारी भावनाओं को कभी कल्पित न कह देना
मैं जो महसूस करता हूँ कलम उसको ही लिखती है
...पाठक...

Friday, 6 October 2017

युद्ध करो

मत आशा करना खादी से ,
यहाँ टोपियाँ बिकती है ।
राजनीति अब वही नहीं जो
आप सबों को दिखती है ।
.
जिन्हें राजनीति करनी है ,
खूब करें , आज़ादी है ।
पर सच है सेनाओं की
हत्यारिन भी खादी है ।
.
इसीलिए हे वीर जवानों ,
अपनी चेतनता बुद्ध करो ।
सवा अरब जनता कहती है
जनादेश है युद्ध करो ...

 - जयशंकर पाठक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, 28 September 2017

युद्ध करो

कब तक सर कट जाने दोगे ?
कब तक गोली खाओगे ?
नेताजी की चुप्पी पर तुम ,
कब तक मारे जाओगे ?
.
सवा अरब के साहस हो तुम ,
क्यों सब कुछ सह जाते हो ?
हे वीरों पत्थर खाकर भी ,
क्यों तुम चुप रह जाते हो ?
.
घाटी की है हवा विषैली ,
बढ़ो और इसे शुद्ध करो ।
आदेश माँगने वाले वीरों ,
जनादेश है युद्ध करो ।

  - जयशंकर पाठक