Wednesday, 11 October 2017

श्रद्धांजलि

शहीद हुए जो इस मिट्टी पर
आओ उनको नमन करें
आओ मिलकर शीश झुकाकर
उस वीरों को मनन करें
.
हम भारत के वीर सिपाही
प्रण करते हैं मिलकर आज
देकर कतरा खून खून का
रख लेंगे मिट्टी की लाज
.
प्रण करते हैं मातृभूमि पर
आंच नहीं आने देंगे
घुसपैठ हो सीमा पर तो
जीवित नहीं जाने देंगे
.
मिट्टी की अस्मत के खातिर
हम कुछ भी कर सकते हैं
न्योता जो आया वैसा तो
हम हँसकर मर सकते हैं
.
कसम हमे उस रस्सी की
जिसपर झूले थे राजगुरु
हम बढ़कर आगे आएँगे
जब होगी वैसी जंग शुरू
.
धधक रही है दग्ध हृदय में
राष्ट्रवाद की भीषण आग
उत्प्रेरक का काम निभाती
विधवाओं की सूनी मांग
.
प्रण करते हैं उन अश्कों को
हम यूँ ही नहीं बहने देंगे
हर कारक को उन अश्कों का
हम जीवित नहीं रहने देंगे
.
राष्ट्रवाद की सोच समूचे
भारत में लहरा देंगे
कश्मीर नहीं लाहौर पहुँचकर
विजयी तिरंगा फहरा देंगे

- जयशंकर पाठक

Saturday, 7 October 2017

यूँ ही

हमारी भावनाओं को कभी कल्पित न कह देना
मैं जो महसूस करता हूँ कलम उसको ही लिखती है
...पाठक...

Friday, 6 October 2017

युद्ध करो

मत आशा करना खादी से ,
यहाँ टोपियाँ बिकती है ।
राजनीति अब वही नहीं जो
आप सबों को दिखती है ।
.
जिन्हें राजनीति करनी है ,
खूब करें , आज़ादी है ।
पर सच है सेनाओं की
हत्यारिन भी खादी है ।
.
इसीलिए हे वीर जवानों ,
अपनी चेतनता बुद्ध करो ।
सवा अरब जनता कहती है
जनादेश है युद्ध करो ...

 - जयशंकर पाठक
(सर्वाधिकार सुरक्षित)