कब तक सर कट जाने दोगे ?
कब तक गोली खाओगे ?
नेताजी की चुप्पी पर तुम ,
कब तक मारे जाओगे ?
.
सवा अरब के साहस हो तुम ,
क्यों सब कुछ सह जाते हो ?
हे वीरों पत्थर खाकर भी ,
क्यों तुम चुप रह जाते हो ?
.
घाटी की है हवा विषैली ,
बढ़ो और इसे शुद्ध करो ।
आदेश माँगने वाले वीरों ,
जनादेश है युद्ध करो ।
- जयशंकर पाठक